Sunday, 24 November 2013

yaadin kuch ankahi si....




बागीचे की वो कुर्सी जो दिखती है तन्हा अभी,, 
 रखी है कब से उस सागर किनारे बरगद की गोद में.…

नहीं है लेकिन अकेली वो,,उसके हर अंश संग,  
हमारी गुजरी बातों की यादें है उसके जहन में. . .

उस पुराने वृक्ष के बिखरे सूखे पत्तो संग,,  
 जिंदगी के लम्हें खो गए है आज कहीं….
यादों की ये सुहानी पवन इन पत्तों संग,,
ले ना जाए उड़ा कर मुझे उन लम्हों कि गोद में कहीं…. 

साँझ ढले अपने आशियाँ चले पंछियो संग,,  
बीते थे वो लम्हें,उस कृष्ण चाँद के आगाज में
यादों की इन बेइन्तहा परतों में दबे वो दिन,,  
जिन्दा है आज भी इन सहजे हुऐ पुराने ख़तो में  ....

उस अतुल सागर को छलकाने की आस में,, 
चाँदनी की ओट में वो पूरब की मेघांशी
देखी थी उस पल मैने उस सागर के तट पर,, 
तुम्हारे चहरे पर आयी एक मासुम सी खुशी… 

सुकुन के उन पलों में जो सहारा था तुम्हारा, 
उन कांधो पर तुम्हारी जुल्फ़ों का स्पर्श है आज भी
उन यादों कि एक पोटली रखी है बांध कर मैने,,
ली है उसने जगह तुम्हारी,, मेरे इस दिल में अभी…

हुई है अब ये बातें पुरानी बहुत,इस ख़ुशनसीब दिल कि किताब में,,
चुभती है अब तो शूल सी वो,,मेरी जिंदगी के इन बहतरीन पन्नो में…  

लेकीन कहाँ तक जायेगी मुझे छोड़ कर तुम्हारी धुँधली बिसरी यादें,,
जानती है अब तो वो भी,, तुम मेरी साँसों में अब तक भी जो बसी हो..

Friday, 15 November 2013

miss u frnds...



इक जिँदगी थी वो भी,,क्या दिन थे वो भी....

वो दोस्तो के साथ घुमना फिरना,,,,
वो मस्ती के पल मिलके जीना......
चिन्ता कहीँ ना थी,थी फिक्र कोई नहीँ,,,,,
बस मैँ और मेरे दोस्त,और कोई नहीँ....
बने थे वो दोस्त दिल से,इक दूसरे की कमजोरी को भुल के.....
थे सच्चे हम,,जैसे भी थे;मिलते, झगडते,इक दूसरे को मनाते.


चाहे कैसे भी थे,बस तुम ही तो थे, और बाकी दूनिया जाने कहाँ थी.....



वो तुम्हारे साथ ुमने  जाना,,  
बारिश मेँ वो जम के नाचना,,,,
वो रेल की पटरियोँ पर गाने गाना,,,,

वो घंटी बजा कर फिर भाग जाना...

वो हर पल मेँ खुशियाँ मनाना.... 


और गम आने पर एक साथ चिल्लाना..."चल छोड भी यार, होता रहता है।....

वो f.s. के किनारे झुम के चलना .....
वो कविता बनाना और मिल के गाना....
वो Class मेँ इशारोँ मेँ बातेँ करना,,, 


वो घर का टिफिन लूट कर खाना......

मिलेगे एक दिन ऐसे दोस्त फिर से,, 

बनेगे एक दिन ऐसे दोस्त फिर से,,....

Thursday, 14 November 2013

वो भी क्या दिन थे बचपन के...

happy children's day frnds

वो भी क्या दिन थे,,जब गुड्डे खिलोने और खुशियोँ के मेले थे...
जब दोस्तोँ सँग शहर की गलियाँ और मस्ती के अठखेले थे...
कभी बारिश की बुंदोँ को कैद मट्ठी हम करते थे...
समँदर किनारे मिट्टी के वो प्यारे से घरोँदे थे...

वो भी क्या दिन थे बचपन के...

सब दुखोँ से परे, बस खुशियोँ से भरे..
वो भी क्या दिन थे बचपन के,
छोटे छोटे सपने,, दिन दुनिया को भुले...

वो अठन्नी की चोकलेट और हजारोँ के नखरे थे,,

जब कटी पतंग को दौड़ लगाते नन्हेँ से परिदेँ थे,
वो नदी किनारे पेडोँ पर जब खुशियोँ के झुले थे,,
वो कागज के जहाज दोस्तोँ से कभी हमने भी खरिदे थे..

वो भी क्या दिन थे बचपन के,,

भुले बिसरे आँसु और खुशियोँ से पूरे..
वो भी क्या दिन थे बचपन के,,
स्कुल के अधुरे notes लेकीन मस्तियोँ मेँ थे पूरे..

जब मन्दिर की ऊँची घंटी और पापा के कंधे थे...

थके हारे तन और माँ की गौद के बिछोने थे...
वो दीदी के संग घर घर और मिट्टी के खिलोने थे...
भाई के संग लड़ना झगड़ना और साईकिल के रोने थे....

वो भी क्या दिन थे बचपन के...

खाना खाने के नखरे, लेकीन माँ के प्यार के भुखे...
वो भी क्या दिन थे बचपन के,
खिलोनोँ के लिये आँसू,,, लेकीन दोस्तोँ संग निखरते थे चेहरेँ...


Wednesday, 13 November 2013

socha na tha....

Jab mile the tumse to ye mana na tha …
Dard kitna milega is jindgi me, “socha na tha”….

Tum aaye the meri jindagi me khusiyo ki baarat laker,,,
Gumo ki manjil milegi in raaho me, “socha na tha”…..

Tum sang har shaam bitana khvahish thi hamai
In raato me bas gahra aasman milega, “socha na tha”…

Tumne aansu bahaye the us din barish ke sang,,,
In bundo tale gum ko chupa logi, “socha na tha”….

Tumse door ho kar is jaha me akele he ab hum,,,,

Tum bin in aakho me aansu honge, “socha na tha”….

Monday, 11 November 2013

I.L.U.

Kahni he ek baat tum se sochta hu kese kahu,,
dhadkan k is ahasaas ko labjo me sochta hu aaj kese kahu .
Ye baatein h mere dil ki, rahti jisme ab tum ho,,
dil me is mahfil ki dastan sochta hu aaj kese kahu. 

Saaso ka mere raj ho tum dhadkan ka mere ahasaas ho,, 
chahat ho is dil ki tum ab,shayad tum hi is dil ki ab aas ho.. 
Kahni he ek baat tum se sochta hu kese kahu,,,,, 
dhadkan k is ahasaas ko labjo me sochta hu aaj kese kahu .....

chand ki jubani...

Husn he tumhara aaj u nikhar raha,
aangan me ho jase ko phool khil raha..
Ku de rahi ho takkar aaj tum us chand ko, 
badha rahi ho tum is dil me jajbaat ko. 
Amavas ki is raat me tumne chandni ko phela diya, 
tumhare is noor par vo chaad bhi sharma gaya.. 

Chand vo khuda ko ye shikva sunaye,
jab khuda tune do chand the banaye,,
to ku bhej diya tumne ek chand ko jami par, 
ku chod diya akala muje is khali gagan par... 

Kahata h vo chand ab is jami k chand se,
badal de jagah ab kuch pal k liye muje se,
mubark ho tuje ye sitare, ye baadal ,ye chandani ki kahani,
me to ab chahu bas tere is dost ki divangi....

Friday, 8 November 2013

I am still waiting for you... M.M.

वो ठंडी सी रातेँ,वो मीठे से सपनेँ,, 
सपनोँ मेँ तेरा वो प्यारा सा आशीयाना.. 
वो बहती सी फिजाऐँ, वो मोती सी बुँदेँ,,
वो मस्ती मेँ तेरा इठला के मुसकाना.. 
याद दिलाता हैँ मुझे हर पल, 
याद आता हैँ मुझे पल पल...

दिल खोल के हसती वो प्यारी  सी अदाऐँ,, 
आखोँ मेँ सपनोँ सी वो प्यारी  सी निगाहेँ,,
वो हसतेँ हूऐँ दिल को तेरा प्यारा सा नजराना,,
वो रुठेँ हूएँ दिल पर खुशियोँ का निशाना .. 
याद दिलाता हैँ मुझे हर पल, 
याद आता हैँ मुझे पल पल... 

वो सोती सी आखोँ मेँ सुबहोँ का ऊजयारा, 
वो मुसकाता चेहरा जैसे झील का किनारा,
वो धीमे से हसतेँ हुए गुजरना तुमहारा,, 
जैसे बादलोँ मेँ छुपता निकलता कोई हो सितारा....
याद दिलाता हैँ मुझे हर पल, 
याद आता हैँ मुझे पल पल...

Tuesday, 5 November 2013

Jane kasa rukh h jindagi ka...



Socha nahi tha kabhi,, 
hua kya h ye abhi....
Gum raha hu yaha vaha.... 
Rah ka nahi h pata.....
Jane kasa rukh h jindagi ka... 
Jane kesa dour h ye jindagi ka....

Kaha jau kis mood mudu.... 
Raah konsi ab me chunu.......
Kya hua h ye,kasi pahali h ye jindagi.
Chahti h kya samjana muje aaj ye jindagi....
ulgan se gira h ye man .... 
Gabra raha h ye dil har pal.....
Jane kasa rukh h jindagi ka... 
Jane kesa dour h ye jindagi ka....
.
Thami h aakhe bas un raaho par meri abhi,,,
dekha tha tumhe aakhiri baari jaha kabhi.....
Sune se is jaha me khada u tanha aaj me,,, 
dundh raha hu tera akas har patte har zarre me.....
Jane kasa rukh h jindagi ka... 
Jane kesa dour h ye jindagi ka....