Tuesday, 29 October 2013

vaada raha tumse......

ये हवाऐँ,ये झरनेँ, ये नदियोँ के किनारेँ,,,  
मुझको अब लगते है इस जहाँ से प्यारे.... 
तेरी बाँहोँ मेँ रहना चाहूँ मेँ हर पल,,, 
इन बाँहोँ से दूर अब जाँऊ मैँ कहाँ .....((1))

मेरी नीदोँ मेँ हो तुम, मेरी सासोँ मेँ बसे हो,,,,
इन सपनोँ मेँ तुम हो,मेरी बातोँ मेँ रमेँ हो.... 
ये प्यारी यादेँ ही चाहूँ मैँ हर पल, 
इन यादोँ से दूर अब जाऊँ मैँ कहाँ ....((2))

इस धड़कन को हर पल बस तेरा साथ हो,,,
इन साँसोँ से हर पल बस तेरी बात हो.... 
ये दिशाएँ,ये फिज़ाएँ, तेरे प्यार की ये कहानी,,, 
इन दिशाओँ से दूर अब जाऊँ मैँ कहाँ ....((3)) 

ये कोयल की गुन गुन, ये पायल की छनछन,,, 
खुशियोँ के बानी,तेरे प्यार की निशानी.... 
दिल से जुडे हर सरगम मेँ तुम हो,,,,
इन गीतोँ से दूर अब जाऊँ मैँ कहाँ...((4)) 

हाँ करती हूँ वादा तुमसे इन आँखोँ की जुबानी,,, 
ये जिँदगी तो अब बस तेरे संग ही बीतानी,,,, 
हर पल, हर लम्हा चाहा है तुम संग,,, 
इन लम्होँ से दूर अब जाऊँ मेँ कहाँ....((5))

Saturday, 26 October 2013

"यादोँ के इस बक्सेँ मेँ"

हर दिशाओँ मेँ तेरी हसीँ गुँजी गुँजी सी है, 
इन हवाओँ मेँ तेरी सासोँ का अहसास मिला मिला सा है। 
तेरे हाथोँ का वो स्पर्श जिन फूलोँ मेँ खिला खिला सा है,
 हर तरफ हर गुलशन को धीमेँ से वो महका रहा है।1

रख लूँ सभाँलकर इन हवाओँ को,
अगर रख सकुँ तो  "यादोँ के इस बक्सेँ मेँ"। 
हाँ कर लूँ कैद इन फुलोँ को, 
अगर कर सकूँ तो "यादोँ के इस बक्सेँ मेँ"2।

तेरी कलाई मेँ इठलाते ये कंगन, 
तेरे कानोँ मेँ झुमते ये झुमके, 
मिलकर जब यूँ गाते है, 
दिल मेँ इक संगीत को हर बार छेड़कर जाते है3।

रख लूँ सभाँल कर इस संगीत को, 
अगर रख सकुँ तो  "यादोँ के इस बक्सेँ मेँ"
हाँ कर लूँ कैद इस सरगम को, 
अगर कर सकूँ तो  "यादोँ के इस बक्सेँ मेँ" 4।

तेरे संग बीते जो पल, 
तेरे साथ के वो प्यारे पहर,
प्यार था भरा उन सब लम्होँ मेँ, 
खुश था मन हर पल पल मेँ5।

रख लूँ सभाँलकर इन लम्होँ को, 
अगर रख सकुँ तो  "यादोँ के इस बक्सेँ मेँ"। 
हाँ कर लूँ कैद इस प्यार को, 
अगर कर सकूँ तो  "यादोँ के इस बक्सेँ मेँ"।6

देना चाहूँ तुम्हेँ ये सजाकर, हाँ थोड़ा सा इत्र लगाकर, 
महके दो फुलोँ के सँग, बारिश की इन बुदोँ के संग.. 
देना चाहूँ तुम्हेँ ये यादोँ भरा बक्सा, 
अगर दे सँकू तुम्हेँ तो, ये यादोँ भरा तोहफा7।

Sunday, 20 October 2013

sacchi dunia


जीवन के महत्व से भी बड़ी,, सिर पर खड़ी ये परेशानियाँ....

ये जीवन की नकली खुशियाँ,, ये झुठी फरेबी किलकारियाँ...
छोटी छोटी बातोँ पर वो दिल का रूठना,,,
सच्ची दूनियाँ के आँगन मेँ सपनोँ का टुटना...
बहुत हुऐ ये नियमोँ मेँ झकड़े अहसास,ये सोच की बँधीशेँ,,,
बहुत हुई ये झुठी मुस्कान,ये अवसाद की रातेँ..... 
बहुत हुऐ ये जीने के झुठे मायने,ये चुभती बातेँ...
जीवन के इस कठोर पलंग पर चिन्ताएँ सिरहाने....


दिल तोडते इन ख्यालोँ को छोड़ अब खुलकर जीना चाहता हूँ...
इस उगते सूरज़ की रोशनी मेँ नये जहाँ को देखना चाहता हूँ...
पहली किरन सँग घर से निकले पछियोँ को देखना चाहता हूँ...
अपने दिल मेँ दबे, खुशियोँ से रोशन जहाँ के सपने को सच करना चाहता हूँ..

मैँ इन बदिशोँ भरे जहाँ को छोड़,,खुली सोच के आसमां मेँ जीना चाहता हूँ...
इन भँगुर सपनोँ भरी नीँद को तोड़ माँ की अक्षय गोद मेँ सोना चाहता हूँ....
इन झुठे फरेबी मुखोटोँ को छोड़ अपनत्व के रस को पीना चाहता हूँ....
मैँ अँकुश सागर की सीमा तोड़ बेरोक लहरोँ मेँ खोना चाहता हूँ....

Wednesday, 16 October 2013

mah.. best frnd...

दिन वो मीठे बचपन के जो,तेरे संग मुझे नसीब हुए।
साल गुजरे,मौसम बदले, बचपन छोड़ हम बडे हुऐ।
कहाँ गये वो दिन,जो संग मेँ तेरे बीते थे।
बचपन की वो मस्ती जब,तेरे संग हम हँसते थे ।।1।।

वो बैठने को दादी की गोदी मेँ,महासंग्राम हम लड़ते थे।
वो छुपी मिठाई के चक्कर मेँ सर्च मिशन हम करते थे।
याद है मुझे सारी रातेँ जब,सिर पर मेरे स्पर्श माँ सा तुम करती थी।
उस पल मेरे ऊठ जाने पर,झुठी नीदँ का नाटक तब तुम करती थी।।2।।

मिल जाये वो दिन फिर से,यहीँ दुआ मैँ अब करता हुँ,
ना हो फिर हम कभी बडे,यहीँ दुआ मैँ अब करता हुँ।।3।।

वो छुपकर मेरे लिये तेरा तोहफे बनाना।
वो तेरी हर चीज पर मेरा हक जताना।
वो झुठ बोलकर माँ की डाँट से मुझे बचाना।
वो स्कुल से छुट्टी के नये नये बहाने सुझाना।।4।।

हाँ तुम मेरी सबसे अच्छी दोस्त थी।
मेरी रग रग को जानती थी।
तभी तो मुझे सताने का हर मौका तुम जानती थी।
तभी तो मुझे मनाने का हर तरिका तुम जानती थी।।5।।

वो तेरा मेरा बार बार झगडना,फिर कई दिनो तक बात ना करना।
तेरा मुझे हर बार मनाना,वो तेरा भाई कहकर बुलाना।
वो दिन भी कितने हसीँ थे,जब बातेँ घटोँ हम करते थे।
वो संग मेँ तेरे, गलियोँ मेँ छुपन छुपाई हम खलते थे।।6।।

परीक्षा के वो दौर,जब तुम दिनभर मुझे पढाती थी,
मेरे चक्कर मेँ अपनी पूरी दिनचर्या तुम भुल जाती थी।
मिल जाये वो दिन फिर से,यहीँ दुआ मैँ अब करता हुँ।
ना हो फिर हम कभी बडे,यहीँ दुआ मैँ अब करता हुँ।।7।।

Kuch to baat h...


कुछ तो असर था मेरी उन बातोँ मेँ, 
आज कुछ तो फर्क है हमारी इन मुलाकातोँ मेँ। 
मैनेँ तो दिल मेँ थोडी सी पनाह माँगीँ थी, 
तुमने खामोशी भर दी हमारी इन सासोँ मेँ ।।1।। 
...... 
आज मेरा दिल बस यही एक बात कहता है, 
खता क्या हुई मुझसे बस इक बात पुछता है। 
वो कहती है"मैनेँ सभी रिश्ते भुला दिये", 
पर उनका दिल तो कोई और ही जुँबा कहता है।।2।। 
........ 
कुछ सहमेँ से, कुछ बिखरे से,हम उनको हर बार ये बताते है, 
हम उनके दिल के हिस्से है, उनकी धडकन मेँ समाते है। 
फिर क्योँ अपने दिल को वो हर बार चुप कराती है, 
जब अनकहे ही उनकी बातेँ फिजाओँ मेँ गुँज जाती है ।।3।। 
....... 
उसके दिल के आँगन मेँ, मेरी यादोँ का दिया जब जलता है, 
जौत की उस रोशनी मेँ संग संग वो भी मरता है। 
फिर क्योँ वो जताती है,कि वो मुझको भुल गयी", 
जब उसकी आँखोँ मेँ भी मेरा अक्स आंसूँ बनकर रहता है।।4।। 
........ 
हम हर उन राहोँ पर उनके संग संग चलते थे, 
प्यारे जीवन के मीठे सपने पल पल मेँ तब सिमटे थे. 
फिर क्योँ अब वो कहती है,ये राहेँ उसको पसंद नहीँ, 
जब उसके पैरोँ के निशाँ अब भी उन राहोँ पर मिलते है।।5।। 
........ 
हम उनके कदमोँ का पीछा हर बार करते है, 
बस मुलाकात कहीँ हो, ये दुआ हर बार करते है. 
वो जान कर भी अनजान हर बार रहती है, 
तब भी हम उनका जन्मोँ इंतजार किया करते है।।6।। 
............ 
यह जन्म तो अब युँही इस बार गुजर जाऐगा, 
वादा रहा, अगले जन्म दिल तुम्हारा हो जाऐगा। 
मेरे दिल मेँ जिस धडकन का नाम तुम हो, 
वो दिल फिर एक दिन तुम्हारी रुह मेँ मिल जाऐगा।।7।। 
............................

महफिल की इक शाम.....

                                               
                                                 

Wednesday, 9 October 2013

सोचता हूँ आज क्या लिखूँ..

बस मेँ झाकतेँ इन फूलोँ के संग,, 
हसते खेलते इन बच्चोँ के संग... 
बारिश की इन बुदोँ के संग, 
पहाडी इन राहोँ के संग. 
सोचता हूँ आज क्या लिखूँ..... 

दिल का मैँ हाल लिखूँ, 
या फुलोँ का मैँ साथ लिखूँ... 
धडकन का मैँ अहसास लिखूँ,
या हवाओँ का मैँ साज़ लिखूँ.... 

कलम है हाथ मेँ,,दिल खुश है आज,, 
सासोँ मेँ शब्द है,,मन मेँ है विश्वास.... 
सोचता हूँ आज क्या लिखूँ.....