हर दिशाओँ मेँ तेरी हसीँ गुँजी गुँजी सी है,
इन हवाओँ मेँ तेरी सासोँ का अहसास मिला मिला सा है।
तेरे हाथोँ का वो स्पर्श जिन फूलोँ मेँ खिला खिला सा है,
हर तरफ हर गुलशन को धीमेँ से वो महका रहा है।।1।।
रख लूँ सभाँलकर इन हवाओँ को,
अगर रख सकुँ तो "यादोँ के इस बक्सेँ मेँ"।
हाँ कर लूँ कैद इन फुलोँ को,
अगर कर सकूँ तो "यादोँ के इस बक्सेँ मेँ"।।2।।
तेरी कलाई मेँ इठलाते ये कंगन,
तेरे कानोँ मेँ झुमते ये झुमके,
मिलकर जब यूँ गाते है,
दिल मेँ इक संगीत को हर बार छेड़कर जाते है।।3।।
रख लूँ सभाँल कर इस संगीत को,
अगर रख सकुँ तो "यादोँ के इस बक्सेँ मेँ"।
हाँ कर लूँ कैद इस सरगम को,
अगर कर सकूँ तो "यादोँ के इस बक्सेँ मेँ" ।।4।।
तेरे संग बीते जो पल,
तेरे साथ के वो प्यारे पहर,
प्यार था भरा उन सब लम्होँ मेँ,
खुश था मन हर पल पल मेँ।।5।।
रख लूँ सभाँलकर इन लम्होँ को,
अगर रख सकुँ तो "यादोँ के इस बक्सेँ मेँ"।
हाँ कर लूँ कैद इस प्यार को,
अगर कर सकूँ तो "यादोँ के इस बक्सेँ मेँ"।।6।।
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देना चाहूँ तुम्हेँ ये सजाकर, हाँ थोड़ा सा इत्र लगाकर,
महके दो फुलोँ के सँग, बारिश की इन बुदोँ के संग..
देना चाहूँ तुम्हेँ ये यादोँ भरा बक्सा,
अगर दे सँकू तुम्हेँ तो, ये यादोँ भरा तोहफा।।7।।

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