Wednesday, 16 October 2013

mah.. best frnd...

दिन वो मीठे बचपन के जो,तेरे संग मुझे नसीब हुए।
साल गुजरे,मौसम बदले, बचपन छोड़ हम बडे हुऐ।
कहाँ गये वो दिन,जो संग मेँ तेरे बीते थे।
बचपन की वो मस्ती जब,तेरे संग हम हँसते थे ।।1।।

वो बैठने को दादी की गोदी मेँ,महासंग्राम हम लड़ते थे।
वो छुपी मिठाई के चक्कर मेँ सर्च मिशन हम करते थे।
याद है मुझे सारी रातेँ जब,सिर पर मेरे स्पर्श माँ सा तुम करती थी।
उस पल मेरे ऊठ जाने पर,झुठी नीदँ का नाटक तब तुम करती थी।।2।।

मिल जाये वो दिन फिर से,यहीँ दुआ मैँ अब करता हुँ,
ना हो फिर हम कभी बडे,यहीँ दुआ मैँ अब करता हुँ।।3।।

वो छुपकर मेरे लिये तेरा तोहफे बनाना।
वो तेरी हर चीज पर मेरा हक जताना।
वो झुठ बोलकर माँ की डाँट से मुझे बचाना।
वो स्कुल से छुट्टी के नये नये बहाने सुझाना।।4।।

हाँ तुम मेरी सबसे अच्छी दोस्त थी।
मेरी रग रग को जानती थी।
तभी तो मुझे सताने का हर मौका तुम जानती थी।
तभी तो मुझे मनाने का हर तरिका तुम जानती थी।।5।।

वो तेरा मेरा बार बार झगडना,फिर कई दिनो तक बात ना करना।
तेरा मुझे हर बार मनाना,वो तेरा भाई कहकर बुलाना।
वो दिन भी कितने हसीँ थे,जब बातेँ घटोँ हम करते थे।
वो संग मेँ तेरे, गलियोँ मेँ छुपन छुपाई हम खलते थे।।6।।

परीक्षा के वो दौर,जब तुम दिनभर मुझे पढाती थी,
मेरे चक्कर मेँ अपनी पूरी दिनचर्या तुम भुल जाती थी।
मिल जाये वो दिन फिर से,यहीँ दुआ मैँ अब करता हुँ।
ना हो फिर हम कभी बडे,यहीँ दुआ मैँ अब करता हुँ।।7।।

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